टीएमयू को जनरेशन ग्रीन कैंपेन के लिए ईको चैंपियन की मान्यता

Ramesh Kuriyal
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ओप्पो इंडिया और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन- एआईसीटीई के संयुक्त तत्वावधान में संचालित जनरेशन ग्रीन-2024 कैंपेन के तहत तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद को ईको कान्शियस चैंपियन इंस्टिट्यूशन के रूप में मान्यता मिली है। एआईसीटीई-ओप्पो इंडिया जेनरेशन ग्रीन इम्पैक्ट रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी को चेंज मेकर संस्थान के रूप में प्रदर्शित किया गया है। रिपोर्ट में उल्लेख है, टीएमयू का एक क्षेत्रीय हब संस्थान बनना, दीगर शैक्षणिक संस्थानों का मार्गदर्शन करना, उद्योग जगत के नेताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों के साथ संबंध बढ़ाना, विशेषज्ञों के नेतृत्व में हरित कौशल और ई-कचरा प्रबंधन पर उन्नत कार्यशालाओं और प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन इसकी प्राथमिकताएं हैं। टीएमयू को 1एम1बी के फाउंडर एंड चीफ मेंटर श्री मानव सुबोध, एआईसीटीई के चीफ कोर्डिनेटिंग ऑफिसर डॉ. चंद्रशेखर बुद्ध और ओप्पो इंडिया के पब्लिक अफेयर्स हेड श्री राकेश भारद्वाज की ओर से रेकिग्निशन का सर्टिफिकेट प्रदान किया है। इस कैंपेन में स्टुडेंट सोसाइटी- टीआईएमएक्स की भी उल्लेखनीय भूमिका रही।

यूनिवर्सिटी की इस उपलब्धि से गदगद वीसी प्रो. वीके जैन कहते हैं, “यह मान्यता स्थिरता और पर्यावरणीय प्रबंधन के प्रति टीएमयू के समर्पण का प्रमाण है। हम अपने छात्रों को जिम्मेदार वैश्विक नागरिक बनने और स्वच्छ एवम् हरित भविष्य में योगदान देने वाली पहल के नेतृत्व को प्रेरित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। टीएमयू को यह मान्यता ई-वेस्ट मैनेजमेंट की सस्टेनेबिलिटी एंड रेसपॉनसेबिलिटी और आने वाली जनरेशन के लिए क्लीनर और ग्रीनर योगदान की प्रतिबद्धता के लिए मिली है। बकौल कैंपेन के फेसिलेटर एवम् एसोसिएट डीन एकेडमिक्स डॉ. अमित कंसल, टीएमयू में इलेक्ट्रॉनिक कचरा संग्रहण अभियान, स्थिरता प्रथाओं को बढ़ावा देने और विश्वविद्यालय समुदाय को उचित ई-कचरा निपटान के बारे में शिक्षित करके अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। टीएमयू ने जेनरेशन ग्रीन कैंपेन में अग्रणी भूमिका निभाने का संकल्प लिया है। यूनिवसिटी सक्रिय रूप से सभी विषयों के छात्रों को व्यावहारिक इंटर्नशिप, इंटरैक्टिव कार्यशालाओं और जिम्मेदार ई-कचरा प्रबंधन पर जागरूकता कार्यक्रमों में शामिल करती है। इन प्रोग्राम्स का उद्देश्य छात्रों को हरित कौशल से लैस करना और पूरे परिसर में पर्यावरण चेतना की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

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