उत्तराखंडस्वास्थ्य

रक्तदाताओं को किया गया सम्मानित

एम्स ऋषिकेश में महीनेभर चला रक्तदान शिविर का आयोजन

एम्स ऋषिकेश में विश्व स्वैच्छिक रक्तदाता दिवस के उपलक्ष्य में माहभर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों का शनिवार (आज) को विधिवत समापन हो गया।  इस अवसर पर संस्थान की ओर से आयोजित रक्तदान शिविरों के आयोजकों तथा रक्तदाताओं को सम्मानित किया गया।
एम्स ऋषिकेश के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन (ब्लड बैंक) विभाग द्वारा विश्व रक्तदाता दिवस के उपलक्ष्य में जून माहभर आयोजित किए गए कार्यक्रम शनिवार को संपन्न हो गए । इस अवसर पर कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि चिकित्सा अधीक्षक प्रो. संजीव कुमार मित्तल, उपनिदेशक प्रशासन लेफ्टिनेंट कर्नल अच्च्युत रंजन मुखर्जी आदि अतिथियों ने किया।                                                                                             इस मौके पर एमएस प्रो. संजीव कुमार मित्तल, उप निदेशक एआर मुखर्जी, प्रधानाचार्य नर्सिंग कॉलेज प्रो. स्मृति अरोड़ा, मेडिकल ऑन्कोलॉजी हेमाटोलॉजी) विभागाध्यक्ष प्रो.उत्तम कुमार नाथ, डॉ.अनुभा अग्रवाल, डॉ. बिश्वजीत साहू,डॉ.गौरव ढींगरा, डॉ. रवि फुलवार व डॉ.  रूपिंदर देओल ने रक्तदाताओं व रक्तदान शिविर के आयोजन में सहयोग करने वाले समाजसेवियों को संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया ।
बताया गया कि  प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी एम्स द्वारा विश्व रक्तदाता दिवस के उपलक्ष्य में जून माह में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का किया गया। जिसके तहत  बीती 14 जून को रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया जिसमें 234 स्वैच्छिक रक्तदाताओं द्वारा महादान किया गया।
 स्वैच्छिक रक्तदान जागरूकता के लिए ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग द्वारा रक्तदान पोस्टर बनाना,  स्टीकर तथा टी -शर्ट डिजाइनिंग प्रतियोगिताएं आयोजित की गई।
आयोजित समारोह के अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक प्रो. संजीव कुमार मित्तल ने बताया कि रक्तदान से बढ़कर कोई दूसरा महानदान नहीं है। उन्होंने बताया कि  रक्तदान करने वाला व्यक्ति के इस संकल्प से किसी रक्त की जरुरत से जूझ रहे व्यक्ति को जीवनदान मिल सकता है।  लिहाजा रक्तदाताओं के इस सराहनीय कार्य से मरीजों की रक्त की आवश्यकता पूरी हो जाती है।                                         उपनिदेशक प्रशासन लेफ्टनेंट कर्नल ए. आर. मुख़र्जी ने कहा कि रक्तदाताओं को स्वयं भी नियमितरूप से समय समय पर रक्तदान करना चाहिए, साथ ही दूसरे लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि दूसरों को रक्तदान के लिए जागरुक कर ही हम किसी जरुरतमंद को रक्त देकर उसके अमूल्य जीवन को बचा सकते हैं।
इस अवसर पर आयोजन समिति की प्रमुख व ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. गीता नेगी ने बताया कि उत्तराखंड क्षेत्र में स्वैच्छिक रक्तदान बेहतर तरीके से हो रहा है,  इसके लिए लोग जागरुक होने लगे हैं। उन्होंने बताया कि कोविड महामारी में रक्त की जरुरत को पूरा करने के लिए शिविर आयोजकों और स्वैच्छिक रक्तदाताओं से हरसंभव सहायता मिल रही है।सम्मेलन में विभाग की डॉ. दलजीत कौर और डॉ. आशीष जैन ने बताया कि रक्तदान शिविरों का आयोजन अतिआवश्यक है जिसमें न केवल रक्त की उपलब्ध हो पाता है बल्कि जनमानस को इस नेक कार्य से सेवा की प्रेरणा भी मिलती है।
गौरतलब है कि हरवर्ष 14 जून को कार्ल लैंडस्टीनर की जयंती विश्व रक्तदाता दिवस के रूप में मनाई जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसकी पहल करते हुए सर्वप्रथम 14 जून 2004 को विश्व रक्तदाता दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी।

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