उत्तराखंड

वैश्विक पहचान और स्टार्टअप में आईपीआर की अहम भूमिका

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तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के फिजियोथेरेपी विभाग में इंस्टिट्यूशन इन्नोवेशन काउंसिल-आईआईसी के तहत इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी राइट- आईपीआर फॉर इन्नोवेशन एंड स्टार्ट अप्स इन फिजियोथैरेपी पर सेमिनार

अनुभवी आईपी मैनेजर, पेटेंट एजेंट और स्टार्टअप मेंटर डॉ. उमेश कुमार के. यू. ने आईपीआर की मूलभूत अवधारणाओं को समझाते हुए कहा, इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी राइट- आईपीआर किसी भी शोध, आविष्कार या रचनात्मक सामग्री को चोरी या दुरुपयोग से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। आज के प्रतिस्पर्धी युग में नवाचार और तकनीक का महत्त्व तेज़ी से बढ़ रहा है। ऐसे में आईपीआर न केवल शोधकर्ताओं की सुरक्षा करता है, बल्कि उन्हें आर्थिक लाभ, अंतर्राष्ट्रीय पहचान और स्टार्टअप स्थापित करने के अवसर भी प्रदान करता है। डॉ. उमेश ने पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए उनके व्यावहारिक उपयोगों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया, पेटेंट किसी नए तकनीकी आविष्कार को 20 वर्षों के लिए सुरक्षा प्रदान करता है। पेटेंट के बाद कोई अन्य व्यक्ति उस तकनीक की नकल, निर्माण या बिक्री नहीं कर सकता। कॉपीराइट रचनात्मक कार्यों- जैसे पुस्तकों, लेखों, सॉफ़्टवेयर, वीडियो सामग्री को स्वचालित सुरक्षा प्रदान करता है। ट्रेडमार्क के माध्यम से कोई भी कंपनी अपने ब्रांड नाम, लोगो या टैगलाइन को सुरक्षित कर सकती है, जिससे उसकी बाज़ार में एक विशेष पहचान स्थापित होती है। डॉ. उमेश तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के फिजियोथेरेपी विभाग में इंस्टिट्यूशन इन्नोवेशन काउंसिल-आईआईसी के तहत इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी राइट- आईपीआर फॉर इन्नोवेशन एंड स्टार्ट अप्स इन फिजियोथैरेपी पर आयोजित सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। इस मौके पर डिपार्टमेंट ऑफ फिजियोथैरेपी की एचओडी डॉ. शिवानी एम. कौल की गरिमामयी मौजूदगी रही।

मुख्य वक्ता डॉ. उमेश कुमार ने स्टुडेंट्स को यूनिकॉर्न स्टार्टअप की अवधारणा को बताते हुए कहा, यूनिकॉर्न वे कंपनियां होती हैं, जिनकी वैल्यू एक बिलियन डॉलर से अधिक हो जाती है। भारत में उभरते हुए युवा उद्यमियों ने कई सफल यूनिकॉर्न- जैसे ओला, ज़ोमैटो, बायजूस और पेटीएम का निर्माण किया है। डॉ. उमेश ने स्पष्ट किया कि यूनिकॉर्न बनने के लिए किसी स्टार्टअप को अनोखी समस्या का समाधान, मजबूत तकनीक, आईपीआर संरक्षण, निवेशकों का भरोसा और व्यापक बाज़ार रणनीति अपनानी होती है। फिजियोथेरेपी और हेल्थकेयर के क्षेत्र में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट रिहैबिलिटेशन उपकरण, रोबोटिक-असिस्टेड थेरेपी, बायोमैकेनिक्स आधारित एनालिटिक्स, टेली-फिजियोथेरेपी और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं। स्टुडेंट्स वास्तविक जीवन की समस्याओं की पहचान कर नवाचारपूर्ण समाधान विकसित करें और उन्हें आईपीआर के माध्यम से सुरक्षित कर स्टार्टअप के रूप में आगे बढ़ाएं। सफल स्टार्टअप शुरू करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम समस्या की सही पहचान और समाधान का विकास है। इसके बाद प्रोटोटाइप निर्माण, आईपीआर संरक्षण, कंपनी पंजीकरण, फंडिंग प्राप्त करना और अंततः उत्पाद को बाज़ार में लॉन्च करना आवश्यक होता है। उन्होंने बताया, एमएनसीज़ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए लगातार नवाचार, अनुसंधान एवं विकास में निवेश, ब्रांडिंग, लागत प्रबंधन, और आईपीआर सुरक्षित तकनीकों का उपयोग करती हैं। इन रणनीतियों को समझना युवाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही सिद्धांत भविष्य में उन्हें अपने स्टार्टअप को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद करेंगे।

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