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स्वर्गीय महेश पंवार को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

उत्तरकाशी। सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय रहे वरिष्ठ आंदोलनकारी ने अपने दिवंगत साथी स्वर्गीय महेश पंवार को याद करते हुए संघर्षों से भरे बीते दिनों को भावुकता के साथ स्मरण किया। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी की धरती ने हमेशा उन्हें और उनके साथियों को समाज और प्रदेश के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन से लेकर विभिन्न जन मुद्दों पर हुए आंदोलनों में स्वर्गीय महेश पंवार हमेशा उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। टिहरी से लेकर बरेली तक के आंदोलनों, भूकंप के बाद भटवाड़ी गोलीकांड, गणेशपुर-गवांणा के संघर्ष, गढ़वाल विकास निगम की फैक्ट्री में कार्यरत दैनिक वेतनभोगियों के हक के लिए किए गए आमरण अनशन सहित कई आंदोलनों में उन्होंने नेतृत्व की भूमिका निभाई।

उन्होंने बताया कि इन संघर्षों में कई अन्य साथियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनमें शोविंद्र चंद्र रमौला, जेठालाल भारती, विष्णुपाल रावत, कृष्ण भट्ट, नरेश भट्ट, प्रीतम पंवार, पूर्व विधायक केदार सिंह रावत और स्वर्गीय नेमचंद लाल जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी ने मिलकर समाज और क्षेत्र के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया।

उन्होंने स्वर्गीय महेश पंवार के व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि जब वह किसी मुद्दे पर खड़े हो जाते थे तो लोग उनकी बात को गंभीरता से सुनते और उस पर विचार करते थे।

उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों का जिक्र करते हुए बताया कि आंदोलनों के दौरान उन पर 15–16 मुकदमे भी दर्ज हुए थे, जिनसे उन्हें उनके भाई अधिवक्ता आनंद सिंह पंवार ने निशुल्क कानूनी सहायता देकर बरी कराया।

उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी की धरती ने उन्हें कई कठिन परिस्थितियों से गुजरते हुए भी समाज के लिए लड़ने की ताकत दी। उन्होंने वर्ष 1991 के भूकंप की दर्दनाक यादों का जिक्र करते हुए बताया कि उस त्रासदी में उन्होंने अपनी मां और चार बच्चों को खो दिया था। इसके बावजूद उन्होंने भटवाड़ी तहसील में आमरण अनशन किया और जनहित के मुद्दों पर लगातार संघर्ष करते रहे। गंगा नदी के किनारे खनन जैसे कई मुद्दों पर भी उन्होंने आवाज उठाई।

उन्होंने बताया कि 27 फरवरी 2026 को केदारघाट में जब स्वर्गीय महेश पंवार की अंतिम यात्रा के दौरान उनका पार्थिव शरीर अग्नि को समर्पित किया जा रहा था, तब वे कुछ देर तक चुपचाप उसे देखते रहे। उस समय उनके मन में बीते संघर्षों की अनेक यादें ताजा हो गईं। उन्होंने कहा कि आज जिस समाज ने उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए एकजुट होकर अंतिम विदाई दी, वह उनके संघर्षों और समर्पण का ही परिणाम है।

उन्होंने कहा कि स्वर्गीय महेश पंवार का जीवन समाज के लिए समर्पित रहा और उनके संघर्षों की यह विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।

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